India pakistan

भारत पाकिस्तान






15 अगस्त 1947, भारत माता के दो टुकड़े हुए, जिसमे एक था भारत, दूसरा पाकिस्तान।  जैसे की एक माँ के दो बेटे अलग हो गए। इतने जुदा की एक दूसरे का नाम भी नहीं सुन सकते। दोनों का खून खौलता है दूसरे देश का नाम भी सुनते है तो। 


200 साल विदेशी प्रजा हमारे देश में राज कर गए। जो व्यापार के लिए भारत में आये थे। और भारत पर ही राज कर गए। इनमे उनकी  कोई गलती नहीं है। हमारा कोई हक नहीं उनपे कोई भी इल्जाम लगाये। क्योकि उन्होंने राज इसिलिए किया क्योंकि हमारे बीच एकता न थी। हम लोग ही उनके साथ मिलकर चाहे वह कोई भी वजह से हो उनका साथ दिया है। जब कोई क्रांतिकारी खड़ा होकर हमारी आज़ादी के लिए लड़ता था तब उन्ही अंग्रेज के सरकारी कर्मचारी जो हमारे ही लोग थे वो ही उन क्रन्तिकारीयो के लिए दीवार खड़ी कर देते थे। और वो बेचारे अपने लोगो पर हाथ भी नहीं उठाना चाहते थे। 

फिर भी हम एक हुए और आजादी पाई। पर कौन सी एकता? भारत पाकिस्तान तो अलग हो गए। आज भी दोनों में से कोई झुकने को तैयार नहीं। इसी बात का फायदा हमारे देश के नेता लोग उठाये जा रहे है। कही भी कुछ भी हुआ इनमे पाकिस्तान के आतंकी ओ का हाथ है। कौन से पाकिस्तान वाले? क्या वहाँ इंसान नही बसते? उन लोगो में इंसानियत नहीं है क्या? बिलकुल है। दिल में दुश्मनो को खत्म कर देने की आग जलाये रखने वाले खुद ही दुश्मन पैदा कर रहे है। जब भारत पाकिस्तान अलग हुए थे तब की प्रजा तो कब की मर चुकी। जो बचे है उन में कोई खास जान नहीं रही। तो फिर ये दुश्मनी का जहर का बीज आज की प्रजा में कौन बो रहा है?  क्या उसे हम भुला नहीं सकते? 

सोचो, वो भारत माता जिसकी हम सब संतान है, चाहे वो भारत हो या पकिस्तान वो आज ये सब देख रही होगी तो क्या उसकी आँखों से आंसू नहीं बहते होंगे? जिस देश की हम पूजा करते है , जिस माता की सुरक्षा  के लिए कई क्रन्तिकारीओ ने अपनी जान दे दी , ताकि आगे की पीढ़ी को कोई जुर्म न सहने पड़े क्या वो ये सब देख कर खुश हो रही होगी?  भारत या पाकिस्तान कोई भी हो, दोनो के वतनी, सैनिक यह कहते है आज दुश्मनो को खत्म करके ही लौटेंगे, कौन है वो दुश्मन? क्या वो हमारे ही लोग नहीं? इस देश की रक्षा के लिए दुश्मनो को नहीं उनके दिल से दुश्मनी को मिटाना होगा। भले ही दो देश अलग हो गए, पर मिल झूलकर रहेंगे तो कोई भी दूसरा देश हम पर आँख उठा कर नहीं देख सकेगा। 

जो शस्त्र एक देश के हित के लिए दूसरे देश पे चलते है अगर वो देश के हित के लिए चले तो दोनों देशों का भला होगा। न ही बेकार में लोग शहीद होंगे। जिससे एक दूसरे के देश को हानि पहुँच रही है उसी ऊर्जा को दोनों देशों के हित में उपयोग किया जाये तो दोनों देशों का भला होगा और दोनों देशों के हित के लिए काम होंगे। हर कोई पढ़ेगा, सब के दिल में से दुश्मनी निकल जायेगी , एक दूसरे के लिए प्यार बढ़ेगा और दोनो ही देश विकास के कार्य में आगे बढ़ेगा। और भारत माता का मुस्कुराता हुआ चहेरा जरूर दिखेगा। बस शुरुआत हमसे करनी है इन लड़ाई को खत्म करने की। हर एक बच्चे में एक दूजे के प्रति मान की भावना का बीज बोना होगा।  जातिवाद को दूर कर के हरेक को मिल झूल कर रहना होवा। 


यदि हम ये सब नहीं कर पाए तो अंग्रेज जो इस देश में अंदर ही अंदर झगड़ने का बीज बो गई है जो आज पौधा भी बन चूका है वो बड़ा पेड़ बन जायेगा। क्यों न हम ये बीज हटाकर आपस में प्यार का बीज बो दे। नहीं तो में ये जरूर कहूँगी भले ही भारत से अंग्रेज प्रजा हार कर चली गई, लेकिन दोनों देश का ये हाल ऐसा कर गई है कि वो जीत गए और भारत हार  गए। 


आओ हम दुश्मनी को छोड़कर मित्रता का हाथ बढ़ाए।

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