सप्तर्षि ताराजूथ और ध्रुव मत्स्य ताराजूथ के बीच का भेद हमे रात में आसमान को सुंदर बनाने वाले छोटे छोटे, टिमटिमाते हुए रंग-बि-रंगी सितारों को देखने मे मजा बहुत आता है। खास कर बच्चों को। उनमे कई सितारों को जोड़ कर कई आकृतिया भी बनाते है। सही कहा न!? School में हमें इन सितारों के बारे में पढाया भी जाता है। इन तारो को बिंदु रूप समझकर उनके बीच काल्पनिक लकीरे खींच कर कुछ आकृतिया बनाई गई थी। जिसे दूसरी शताब्दी ईसवी में टॉलेमी नामक खगोलशास्त्री ने कुछ 48 तारामंडल की सूची बनाई थी। उसके बाद ओर भी तारामंडल का अभ्यास किया गया है। फिलहाल हम सिर्फ school के लेवल की बात करेंगे। उसके बाद आगे जाएंगे। school में हमे मृग, शर्मिष्ठा, मघा, कृतिका, सप्तर्षि के बारे में पढ़ाया गया है और आज भी पढ़ाया जाता है। आज भी जब मैं इन नक्षत्रों के बारे में पढ़ाती हु तो कई बार बच्चे हर रोज घर जाकर रात के अंधेरे में खुबसूरत टिमटिमाते हुए तारो को देखते है। लेकिन कई बार बच्चे कहते है हमने दो सप्तर्षि देखे। तो असली सप्तर्षि कौन सा है? फिर सोचा यह दिक्कत कई लोगो को होती होगी। तो क्यों न इस बारे...
भारत पाकिस्तान 15 अगस्त 1947, भारत माता के दो टुकड़े हुए, जिसमे एक था भारत, दूसरा पाकिस्तान। जैसे की एक माँ के दो बेटे अलग हो गए। इतने जुदा की एक दूसरे का नाम भी नहीं सुन सकते। दोनों का खून खौलता है दूसरे देश का नाम भी सुनते है तो। 200 साल विदेशी प्रजा हमारे देश में राज कर गए। जो व्यापार के लिए भारत में आये थे। और भारत पर ही राज कर गए। इनमे उनकी कोई गलती नहीं है। हमारा कोई हक नहीं उनपे कोई भी इल्जाम लगाये। क्योकि उन्होंने राज इसिलिए किया क्योंकि हमारे बीच एकता न थी। हम लोग ही उनके साथ मिलकर चाहे वह कोई भी वजह से हो उनका साथ दिया है। जब कोई क्रांतिकारी खड़ा होकर हमारी आज़ादी के लिए लड़ता था तब उन्ही अंग्रेज के सरकारी कर्मचारी जो हमारे ही लोग थे वो ही उन क्रन्तिकारीयो के लिए दीवार खड़ी कर देते थे। और वो बेचारे अपने लोगो पर हाथ भी नहीं उठाना चाहते थे। फिर भी हम एक हुए और आजादी पाई। पर कौन सी एकता? भारत पाकिस्तान तो अलग हो गए। आज भी दोनों में से कोई झुकने को तैयार नहीं। इसी बात का फायदा हमारे देश के नेता लोग उठाये जा रहे है। कही भी कुछ भी हुआ इनमे ...
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