Milky way Galaxy's mass is recalculated

मिल्की वे  आकाशगंगा का नई तकनीक से फिर से उसका  द्रव्यमान मापन, और वह बड़ा पाया गया ।




आकाशगंगा का मनोहर सर्पिल रचना जो NASA के स्पिट्जर अवकाशीय टेलिस्कोप से ली गयी है।

मिल्की वे आकाशगंगा का नया द्रव्यमान मापन 9.5×10^41 किग्रा (950,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000 95 के पीछे 40 झीरो) , अतः इसका द्रव्यमान हमारे सूरज के द्रव्यमान से 4.8×10^11 गुना है। 

यह संसोधन ग्वेन्डोलीन एड़ी के द्वारा एमसी मास्टर यूनिवर्सिटी, कनाडा से किया गया था।

मिल्की वे आकाशगंगा का फिर से द्रव्यमान नापे जाने की जान अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी , ग्रेप्वाईन की विंटर मीटिंग में एड़ी के द्वारा की गई थी।

संसोधनकारो ने बायेसीयन एनालिसिस का उपयोग करके एक संख्या तक पहुचे है। बाएसीयन एनालिसिस अंकगणित का प्रकार है, जो अज्ञात अवयव , संभावना के प्रश्नों का उत्तर देता है। 

संसोधनकारो ने गोलाकार क्लस्टर  ( जो सितारों का संग्रहीत गोलीय भाग है , जो उपग्रह की तरह आकाशगंगा के अंतर्भाग के आसपास कक्षा में घूमता है ) का सीधा मापन किया। अवकाशीय वैज्ञानिक पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव के द्वारा सूर्य का द्रव्यमान भी नाप सकते है। उसी  प्रकार मिल्की वे का सितारों के द्वारा ग्लोबल क्लस्टर की ओर गुरुत्वाकर्षी खिंचाव भी जान सकते है।

एडीस ने वर्णन करते हुए कहा कि ," जो पद्धति का हमने विकास किया है , वो किसी दूसरे अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो दूसरे प्रकार के  संसोधन कर सके। "

"यह पद्धति दूसरे क्षेत्र में उपयोगी हो सकती है, लेकिन वे आज के खगोल विज्ञान में ज्यादा उपयोगी बन चुकी है। जो हमारे कंप्यूटर्स ऐसे जटिल गणना कर सकता है" उन्होंने कहा।

मिल्की वे आकाशगंगा का नया अनुमानित द्रव्यमान में गृह, तारे, वायुओ के बादल, मलबे, डार्क मैटर्स, और दूसरे कई पदार्थ जिससे आकाशगंगा बनी है उन सबका समाविष्ट होता है। 

"सबसे बड़ी बात यह है कि हम अनिश्चित मापन का उपयोग करते है जो हमें विश्लेषण तक ले जाता है।"-एड़ी 

इसीलिए हम द्रव्यमान का अनुमान अच्छी तरह से कर सकते है

निचला स्तर  4.0×10^11 सोलर मासेस है और उपल स्तर 5.8×10^11 है। सामान्य भाषा में  हम इस तरह समाज सकते है कि हमारे सूर्य का द्रव्यमान को 400 से 580 बिलियन गुणा करना।  हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक हमारे सूरज का द्रव्यमान 2 नोनिलियन (मतलब 2 के पीछे 30 ज़ीरो ) किग्रा या हमारी पृथ्वी से 330,000 गुना ज्यादा है। यह गैलेक्टिक द्रव्यमान से यह अनुमान लगा सकते है की आकाशगंगा के मध्य से 125 किमी/सेकंड से द्रव्य बहार आ रहा है । जब द्रव्यमान का अंदाजा  300 किमी /सेकंड  से ज्यादा बढ़ता है, तब द्रव्यमान लगभग 9×10^11 सोलर मासेस होता है। 

हमारी आकाशगंगा मापन करना, या किसी भी आकाशगंगा का मापन करना बहुत मुश्किल है। आकाशगंगा सिर्फ तारे, ग्रह, वायु, मिटटी जैसे पदार्थो से नहीं बनती, बल्कि उसमे डार्क मैटर्स का बड़ा प्रभाव होता है, जो द्रव्य का अदृश्य और रहस्यमय स्वरुप है, जो आज तक पूरी तरह समझ में नहीं आई , और प्रयोगशाला में भी उसे नहीं खोज पाये। खगोलशास्त्री और विश्व विज्ञानशास्त्री दृश्यमान पदार्थो पर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के हकीकत के आधार पर डार्क मैटर का अंदाजा लगा रहे है।

एड़ी, जो भैतिक विज्ञानं एवम खगोलविज्ञान में एमसीमास्टर यूनिवर्सिटी से पीएच. डी. कर चुकी है , वे मिल्की वे आकाशगंगा के द्रव्यमान और उसके डार्क मैटर के घटक पर अपने बैचलर स्कूल के समय से  अभ्यास कर रही है । वे आकाशगंगा की प्रदक्षिणा करते हुए ग्लोबुलर स्टार क्लस्टर का वेग और स्थिति का उपयोग कर रही है। ग्लोब्युलर क्लस्टर की कक्षा का आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण के द्वारा अनुमान लगाया जाता है, जो भरी डार्क मैटर के घटक की मदद से खोजी गई ।  

पहले ही एड़ी ने, जब माहिती अधूरी थी तब ग्लोब्युलर क्लस्टर्स (GCs) का उपयोग करके एक नै तकनीक खोज निकली थी। GC का कुल वेग दो दिशाओं में मापा गया, एक  दृष्टि रेखा की दिशामे और दूसरी आकाश के समतल के पार , जिसे उचित गति  कहते है। संसोधनकार आज तक आकाशगंगा के आसपास के सारे GCs की उचित गति का मापन नहीं कर सके। एड़ी ने ,  उसके बावजूद, इन वेगो का उपयोग करने का रास्ता पहले से ही  खोज निकाला था, जो आकाशगंगा का द्रव्यमान नाप ने के लिए पूरी तरह जाना गया।

अब, एडीस को अंकगणित पद्धति का इस्तेमाल करना पड़ा जिसे अधिक्रमिक बायसियन विश्लेषण के नाम से जाना जाता है जो सिर्फ पूर्ण और अपूर्ण जानकारी को ही शामिल नहीं करता , बल्कि अनिश्चितताओं के मापन को भी एक बहुत ही जटिल अंकगणितीय सूत्र में समाविष्ट करता है। नवीनतम गणना करने के लिए, लेखको को केवल ग्लोबुलर क्लस्टर की स्थिति और वेग के मापन के डेटा को ध्यान में लेते है और जरूरी नहीं है कि यह किंमत सही हो। वे अब मॉडल में सही स्थिति और वे ग को मानकों के रूप में मानते है। 

बायेसियन अंकगणितीय पद्धति नई नहीं है, मगर उनका खगोल - विज्ञान में इसका प्रयोग अब तक प्रारंभिक स्टेज में है और एडी मानती है अब तक की उनकी अनिश्चितता को समायोजित करने की क्षमता अर्थपर्ण परिणाम लाना क्षेत्र के बगत से अवसर को खोल देगी। 

" जैसे युग के बड़े डेटा पहुंचते है, मैं सोचती हूं वो जरुरी है, जो हम ध्यानपूर्वक अंकगणित के बारे में सोचते है, जिसे हम डेटा विश्लेषण में इस्तेमाल करते है, खाश करके खगोल विज्ञान मे जब जानकारी अपूर्ण हो और अचोक्कसता की डिग्री बदल रही हो। " उन्होंने कहा । 

खगोल भौतिकी पत्रिका ने संसोधन को प्रकाशित करने का स्वीकार किया और एडी ने टेक्सास में अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की 229 वे सम्मलेन में 7 जनवरी के दिन परिणाम को उपस्थित किया। 

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